सच कहूँ तो मैं लॉटरी जैसी चीज़ों में ज़्यादा विश्वास नहीं करता। मुझे नहीं लगता कि लॉटरी जीतना किसी बहुत अच्छी या सच्ची किस्मत का प्रमाण है। मेरे अनुसार, असली संतोष और आत्मसम्मान तब मिलता है जब कोई व्यक्ति मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी के साथ UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास करता है या किसी बड़ी सेवा में पहुँचता है।
आज के समय में लोगों को शॉर्टकट और आसान रास्ते ज़्यादा आकर्षक लगने लगे हैं। यही कारण है कि लॉटरी, सट्टा और जुए जैसे माध्यम तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं। Dream11, My11Circle जैसे प्लेटफॉर्म्स ने कई लोगों को इस दलदल में इस कदर फँसा दिया है कि वहाँ से निकलना बेहद कठिन हो जाता है। यह बात मैं किसी आदर्शवादी बनने के लिए नहीं कह रहा हूँ, क्योंकि मैंने स्वयं भी कभी इस दिशा में सोचने की भूल की थी। लेकिन समय, अनुभव और समझदारी के साथ मैं इस सोच से बाहर निकल पाया, जिसके लिए मैं ईश्वर का आभारी हूँ।
मेरा मानना है कि जो सफलता मेहनत से मिलती है, वही व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है। आसान पैसों की लालसा इंसान को धीरे-धीरे कमज़ोर बना देती है और उसे वास्तविक जीवन के संघर्षों से दूर कर देती है।
यदि कभी संयोगवश मैं लॉटरी जीत भी जाऊँ, तो सबसे पहले मैं अपनी सीमित और आवश्यक ज़रूरतों को पूरा करूँगा। लेकिन उससे भी अधिक खुशी मुझे इस बात से होगी कि मैं उन लोगों के लिए कुछ कर सकूँ, जिन्हें वास्तव में मदद की ज़रूरत है। मेरा अनुभव रहा है कि दूसरों के लिए कुछ करने के बाद जो सुकून मिलता है, वह किसी भी भौतिक सुख से कहीं बड़ा होता है।
इसी कारण, यदि मुझे ऐसा कोई अवसर मिले, तो मैं समाज और पर्यावरण के लिए काम करना चाहूँगा—विशेषकर उन लोगों के लिए, जो सबसे अधिक जरूरतमंद हैं। मेरे लिए सच्ची जीत वही होगी, जहाँ मेरा जीवन दूसरों के लिए उपयोगी बन सके।
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